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Shri Devkinandan Thakur Ji
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@dnthakurji

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Shri Devki Nandan Thakur Ji is a orator of Bhagwat Katha & Spiritual Leader. Honoured with Honorary Doctorate for Peace Ambassador,ShantiDoot, Dharm Ratan etc.

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calender Joined on Sep 2020

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@dnthakurji

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बचन बेष क्या जानिए, मनमलीन नर नारि। सूपनखा मृग पूतना, दस मुख प्रमुख विचारि।। तुलसीदास कहते हैं कि किसी भी स्त्री या पुरुष को उसकी मीठी बोली और सुंदर वस्त्रों से उसके मन के भावों की पहचान नहीं की जा सकती। क्योंकि कपड़े तो रावण के भी सुंदर थे और मन से मैली तो सर्पनखा भी थी।
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मुखिया मुखु सो चाहिये खान पान कहूँ एक। पालड़ पोषइ सकल अंग तुलसी सहित बिबेक।। मुखिया (Chief) को हमारे मुहं के समान होना चाहिए। जो खाता तो एक है पर पूरे शरीर का पालन पोषण (Upbringing) करता है। II राधे राधे बोलना पड़ेगा II
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करम प्रधान विस्व करि राखा। जो जस करई सो तस फलु चाखा।। ईश्वर ने कर्म (Deed) को ही महानता दी है। उनका कहना है कि जो जैसा कर्म (Work) करता है उसको वैसा ही फल मिलता है। II राधे राधे बोलना पड़ेगा II
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सचिव बैद गुरु तीनि जौं प्रिय बोलहिं भय आस। राज धर्म तन तीनि कर होई बेगिहीं नास।। यदि गुरू (Guru), वैद्य और मंत्री भय या लाभ की आशा से प्रिय बोलते है तो धर्म (Religion), शरीर और राज्य इन तीनों का विनाश शीघ्र ही तय है। II राधे राधे बोलना पड़ेगा II
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राम नाम मनिदीप धरु जीह देहरीं द्वार। तुलसी भीतर बाहेरहूँ जौं चाहसि उजिआर।। तुलसीदास जी कहते है कि हे मनुष्य (Humans) यदि तुम अपने अन्दर और बाहर दोनों तरफ उजाला चाहते हो तो अपनी मुखरूपी द्वार की जीभरुपी देहलीज (Sill) पर राम नाम रूपी मणिदीप को रखो।
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ॐ त्र्यम्‍बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्‍धनान् मृत्‍योर्मुक्षीय मामृतात् आप सभी को #महाशिवरात्रि की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। बाबा भोलेनाथ के आशीर्वाद से आपके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सौभाग्य आए। ऊँ नम: शिवाय! #HarHarMahadev #Mahashivaratri2021
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अग्निना सिच्यमानोऽपि वृक्षो वृद्धिं न चाप्नुयात्। तथा सत्यं विना धर्मः पुष्टिं नायाति कर्हिचित्।। अर्थ — आग से सींचे गए पेड़ कभी बड़े नहीं होते। उसी प्रकार सत्य के बिना धर्म की स्थापना संभव नहीं है। II राधे राधे बोलना पड़ेगा II
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सत्यं ब्रूयात प्रियं ब्रूयात न ब्रूयात सत्यं प्रियम। प्रियं च नानृतं ब्रूयात एष धर्म: सनातन:।। अर्थ - सत्य बोलो, प्रिय बोलो, अप्रिय लगने वाला सत्य नहीं बोलना चाहिए प्रिय लगने वाला असत्य भी नहीं बोलना चाहिए। II राधे राधे बोलना पड़ेगा II
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दुर्जन:स्वस्वभावेन परकार्ये विनश्यति। नोदर तृप्तिमायाती मूषक:वस्त्रभक्षक:।। अर्थ - दुष्ट व्यक्ति का स्वभाव ही दूसरे के कार्य बिगाड़ने का होता है। वस्त्रों को काटने वाला चूहा पेट भरने के लिए कपड़े नहीं कटता। II राधे राधे बोलना पड़ेगा II
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न कश्चित कस्यचित मित्रं न कश्चित कस्यचित रिपु:। व्यवहारेण जायन्ते, मित्राणि रिप्वस्तथा।। अर्थ - न कोई किसी का मित्र होता है, न कोई किसी का शत्रु। व्यवहार से ही मित्र या शत्रु बनते हैं। II राधे राधे बोलना पड़ेगा II
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