koo-logo
Backback
Swati Sharma
backblock

Swati Sharma

@swati_sharmaH9N3D

Artist

calender Joined on July 2021

KooKooKoo(318)
LikedLikedLiked(215)
Re-Koo & CommentRe-Koo & CommentRe-Koo & Comment(99)
अब तो इतजार है उस उम् का जब दोनो बैठे याद करेगे गुजरे हर लमहे का न होगा कोई जिममेदारी का बोझ न होगा किसी बात का शोर मेर तेरा वकत होगा वो कागज मुड क एक होगा
commentcomment
पति पत्नी एक ही कागज के दो पहलू जिनका सफर शुरु तो कोरे कागज हुआ पर लिखते लिखते इक हसीन सफर बन गया पहलू के एक तरफ पति के जजबात जिमेदारीया ओर वो अधूरे शबद जिस को वो कह न पाया रूठ कर मनाना जिसे कभी न आया पहलू के दूसरी तरफ पत्नी के भाव समझोता झुकना जिसकी अपनी कहानी दोनो कहने को तो है साथ मगर रहते खुद से ही दूर है खुद कोई झगडा नही पर नराज होते वो जरूर है
commentcomment
1
09 Oct
मुझे आज कू की तरफ से मश्ग आया ।की में १९९७फॉलोअर को गए कुक कहु की मु कसी लगा। मैं सब का शुक्रिया करुगी की आप सब न मेरी लेखनी को पैसे की जिस जिससे हौसला मिल है।
commentcomment
1
09 Oct
यारों की यारिया वो पल याद आत है आज भी मुज दोस्तो पुराने दिन याद आत है वो जो भोलापन था सब मे मिलकर है पल भर जीने का आज कल की भागदौड़ ने सब कुछ ही छीन लिया भोलेपन मैं को जवानी आई जेमेदारियो ने फिर जगा बनाई सब कुछ करने मैं खुद को यू वेस्ट किया उम्र के तीसरे पहर मैं किस को पड़ी है आज कौन किस हाल मैं है सालो बाद मिलने पर भी जो न करे गिला शिकवा दोस्त आज भी न बदल रिश्ता
commentcomment
09 Oct
दोस्ती हर एक की जिंदगी का खास रिश्ता बचपन का भोलापन जवानी का जोश युवा का साथ बुढ़ापे मे राज हर रंग मे होता है दोस्ती का रिश्ता ख़ास
commentcomment
1
07 Oct
मेरा तो सपना था खुद का एक घर हो जहां चाय की चुस्की लेते सकूं के कुछ पल हो न बहुत ख्वाहिशें थी शुरू से मेरी न झुठी उम्मीद का कोई जाल हो मगर तुम ने दिला कर के मकान। अरमान सारे मार दिये खाली कर इस दिल को तुम इस जहां को खनडर बना गये
commentcomment
07 Oct
ना जाने कब वो समझेंगे मेरे भी जस्बातो को सुने को बस एक ही बात मेरा दिल भी है बेताब कमाने वाली बिवी जो आई भूल गये सब घर में बहू भी है आई मेरे भी अरमान सब यू ही अधुरे रह गये लगता है अब इस घर मे दो मर्द ही बस रह गये
commentcomment
1
07 Oct
राजनीति कि ऐसी चादर ओढ़ ली है समाज ने कि उढने बेढने खाने पिने मे भी होने लगी है साजिशें इतना रग क्या चढ़ा लिया अपना ही वजूद गवा लिया पहले जो बातें होती थी चाये के खोखे में आज कल होने लगी व्हट्सएप्प फेसबुक के हर कौने में राजनीति ने घर तोडे हर सरहद मे दिवार की ये देश रहा है उसमे भी अब दरार की सोचा था सकूं का कुछ पल कू के साथ बिताऊगी पर यहां भी लोगों ने आलोचना की जगह बना ल
commentcomment
06 Oct
मुझसे जिंदगी ने कुछ पल उधार मांगे मैंने हस के इक उम्र देदी तूने अहसान भी न माना लिखके मुझे जुदाई देदी
commentcomment
06 Oct
हर मुस्कुराहट के पिछे इशारानहीं होता हर आंसुओं के पिछे ग़म नहीं होता बुढ़ापे मे जिसने बचपन को जी लीया उसे और किसी का सहारा नहीं होता
commentcomment
create koo