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Rani Mishra
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Rani Mishra

@rani_mishraLUDGD

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calender Joined on Oct 2021
KooKoo 12
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Re-KooRe-Koo 2
हम ज़िंदगी में जश्न मनाते चले गये अपने गमों को हंस के छुपाते चले गये सीने के दर्द सारे नगमो में पीरो के हम नगमों को महफिलों में सुनाते चले गये रानी मिश्रा
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जय हिंद
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नफरत सी हो गई है मोहबब्त के नाम से लगने लगा है डर अब चाहत के नाम से। थोडी सी रौसनी के लिए दिल तुम न जलालो आंसु ही मिलेगा तुम्हे राहत के नाम से छोडने से पहले पल पल वो तोडेगा खुशीयो की कहानी को गमो से वो जोडेगा इल्जा़म पे इल्ज़ाम लगाएगा वो तुम पर फिर वेवफा का नम दे वो तुमको छोडेगा रुशवाइया तनंहाईया का तौहफा मिलेगा छुप छुप के रोने का अकेले मौका मिलेगा टुटे ना दिल कीसी का पहले ही सभालो वर्ना वफा क
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धीर अधीर लगे जब अपना, मन मे पीर लगे जब अपना। अपनो को बताना छोड़ दिया, ख्वाब हमेशा ख्वाब बने तो। दिल में गहरा घाव लगे तो ख्वाब सजाना छोड़ दिया, रुठ गये जो बेमतलब के छोड़ गये मुझे जब तनहा सब रुठो को मनाना छोड दिया वो पीपल का पेड पुराना उनका वहां था आना जाना हमने वो ठीकाना छोड़ दिया रानी मिश्रा गया बिहार
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जीसे हम चांद कहते थे वो हमसे दुर रहता है नही फुर्सत कभी उसको बहुत मजबुर रहता है हैं मेरा दिल बडा नादान उसी को चाहता हरदम न जाने कीसकी चाहत के नशे मे चुर रहता है रानी मिश्रा
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मेरे मालिक मेरे मालिक मेरे दाता मेरे पालनहारे सृष्टी तुमसे है तुं सृष्टि के हो तारनहारे सुख की साथी भले ही दुनीया ए होती है दुख मे बस याद तुम्हारी ही प्रभु आती हैं तेरी चरणों की धुल जिसको भी मील जाए होगा बडभागी जो सच्चा सुख पाती है मेरे मालिक मेरे दाता मेरे पालनहारे सृष्टि तुमसे है तुं सृष्टि के हो तारनहारे रानी मिश्रा
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रोम रोम है कर्ज में डुबा आंखो से बहता पानी एक कर्ज भारत मां की ए चढा गये बलिदानी
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प्रीत गीत मीत सब हो गए है अर्थ हीन फुहडता , झुम रही सोमरस पान पर। प्रेम की दिवानी मीरा खुद को बताने लगी,श्याम बन नृत्य करे भद्दे से गान पर। एक एक मीत के है कई कई प्रीत देखो ,रास रचाने लगे ता थैया तान पर। मात पिता गुरु की तो बात नहीं माननी है,रामकली संग बैठे दीखीए अलान पर। रानी मिश्रा
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कडी परिश्रम करके जो एक एक पग आगे बढता है वही सफलता की चोटी पर सुरज बन के चमकता है सुख से परे न दुख की बाधा बिच राह में आती हैं बुंद बुंद जब बहे पसीना तन कुंदन सा दमकता है रानी मिश्रा
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भोर के स्वप्न में आज आया है था वो फुल बागों में फीर से खिलाने लगी पास आओ मेरे मैं बुलाने लगी दुर से ही खडा। मुस्कराया था वो जाने कीतने बहाने बनाऐ हो तुम बाद मुद्दत मेरे मेरे पास आऐ हो तुम दिल को शम्मा बनाकर जलाती रही आज बनकर हवा फीर बुझाते हो तुम रानी मिश्रा
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