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हरि ओम तिवारी

@hari_om_tiwari

शिक्षक

अप्प दीपो भव

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calender Oct 2020 में कू पर आए।

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शिक्षक
🏵🌹🥀🌺🌻🌼🌷⚘🌱🪴🌲🌳🌴🌵 एक सवाल है आईने का , देखो तो समझ जाओगे । पहचान लो सूरत अपनी, नही यूँही गुजर जाओगे । ----- हरिओम तिवारी ✍✍ 🏵🌹🥀🌺🌻🌼🌷⚘🌱🪴🌲🌳🌴🌵
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जीवन का प्रवाह अंतर्द्वंद तक है प्रेम का पथ मन से उर तक है । परिक्रमण और परिभ्रमण नियति , मृत्यु का आहार कहर तक है । -- हरिओम तिवारी ✍✍
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निर्झर सी धारा झरती है अंतर्मन में , लिए प्रेम संगीत। कल कल गूँजे स्पंदित, श्वासो के बेकल गीत । मधुर धड़कनें नृत्य करे , फूटे प्रकाश के पुंज । कड़ कड़ गरजे बादल दामिनि दमके हो तन लुंज पुंज । मन अवाक सा ठहरा हुआ धमाका जोर । फूटी अनार सी किरणे, आनन्दित गुंजित शोर । कहाँ ,किधर होश नही बस डूबा सा लगता। आह मृत्यु का आह्लादित, बस मिटता सा लगता । जब लौटी चेतना, विकल वेदना । -- हरिओम तिवारी ✍✍
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कहाँ तक कहूँ तू सुनती ही नही । प्यार का बंधन तू बुनती ही नही ।। न इकरार न इन्कार दोनो लापता , तेरी मेरी जोड़ी क्या बनती ही नही ।। --- हरिओम तिवारी ✍✍
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सौन्दर्य अपने आपमें परिपूर्ण है । -- हरिओम तिवारी ✍✍
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जग का सौन्दर्य, स्नेहिल बंधन, ममत्वपूर्ण, अविरल निर्झर बहाव, ओ प्रेयसी, मनमोहक, निरंतर आलिंगनबद्ध। सुख से सराबोर। किन्तु! बुलाती मेरी आभा । कही दूर । समाधिस्थ, एकांतवासी योगी । ------ हरिओम तिवारी ✍✍
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मौन एकान्त का सर्वश्रेष्ठ वरदान है । --- हरिओम तिवारी ✍✍
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सर्वश्रेष्ठ कृति का सृजन एकान्त में ही हुआ है । --- हरिओम तिवारी ✍✍
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ओ महा तृप्त। प्यास, बुझा । या प्यास बढ़ा । अधर में मत छोड़ । या तो जोड़ या तोड़।। --- हरिओम तिवारी ✍✍
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नज़र है नशीली ,छलकती है मदिरा , अरे मेरे साकी तू मुझको पिला दे । अगर बूँद टपके टपकने ही देना , ये नमकीन चाहत का अमृत पिला दे । मगर ये सुना है तू मीठी सुराही , जरा अपने होठो की चुस्की लगा दे। नशीला बदन है नशीला जोवन है , नशीली अदा की मस्ती लगा दे । थिरकता है तन मन,मचलता है जीवन , सुनो रागनी ,प्रेम दीपक जला दे । सुनो एक हम तुम कही एक होगे , मिलन दिव्यता का मधुर गीत गा दे । -- हरिओम तिवारी ✍✍
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