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S B Singh
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S B Singh

@SureshM46

Retired / कृषि

जिसको न निज गौरव तथा निज देश का अभिमान है । वह नर नहीं नर-पशु निरा है , और मृतक समान है ॥ ***** ***** ***** ***** ***** अष्टादस पुराणेषु व्यासस्य वचनद्वयम् । परोपकारः पुण्याय पापाय परपीडनम् ॥🙏 यतो धर्मस्ततो जयः 🙏

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calender Joined on Feb 2021

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11 Nov
@SureshM46

Retired / कृषि

प्रथमे नार्जिता विद्या, द्वितीये नार्जितं धनम् । तृतीये नार्जितं पुण्यम् , चतुर्थे किं करिष्यति ॥ भावार्थ:- जिस मनुष्य ने पहले आश्रम ( ब्रह्मचर्य ) में विद्या नहीं अर्जित किया , दूसरे आश्रम ( गृहस्थ ) में धन नहीं अर्जित किया , तीसरे आश्रम ( वानप्रस्थ ) में पुण्य नहीं अर्जित किया वह मनुष्य चौथे आश्रम ( सन्यास ) में क्या अर्जित करेगा ? #सुभाषितानि
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11 Nov
@SureshM46

Retired / कृषि

नीलाम्बुजश्यामलकोमलांगं , सीतासमारोपितवामभागम्‌। पाणौ महासायकचारुचापं नमामि रामं रघुवंशनाथम्‌॥ ॥ जय श्री सीताराम ॐ ॥ 🙏🚩 भावार्थ:-नीले कमल के समान श्याम और कोमल जिनके अंग हैं, श्री सीताजी जिनके वाम भाग में विराजमान हैं और जिनके हाथों में (क्रमशः) अमोघ बाण और सुंदर धनुष है,उन रघुवंश के स्वामी श्री रामचन्द्रजी को मैं नमस्कार करता हूँ॥
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09 Nov
@SureshM46

Retired / कृषि

विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय , लम्बोदराय सकलाय जगद्धिताय । नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय , गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते ॥ ॥ ॐ श्री गणेशाय नमः ॐ ॥ 🙏🚩 भावार्थ :- विघ्नेश्वर, वर देनेवाले, देवताओं को प्रिय, लम्बोदर, कलाओंसे परिपूर्ण, जगत् का हित करनेवाले, गजके समान मुखवाले और वेद तथा यज्ञ से विभूषित पार्वतीपुत्र को नमस्कार है ; हे गणनाथ ! आपको नमस्कार है ।
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09 Nov
@SureshM46

Retired / कृषि

सीतारामगुणग्रामपुण्यारण्यविहारिणौ। वन्दे विशुद्धविज्ञानौ कवीश्वरकपीश्वरौ॥ ॥ ॐ श्री हनुमते नमः ॐ ॥ 🙏🚩 भावार्थ:- श्री सीतारामजी के गुणसमूह रूपी पवित्र वन में विहार करने वाले,विशुद्ध विज्ञान सम्पन्न कवीश्वर श्री वाल्मीकिजी और कपीश्वर श्री हनुमानजी की मैं वन्दना करता हूँ॥🙏
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08 Nov
@SureshM46

Retired / कृषि

गङ्गातरङ्गरमणीयजटाकलापं , गौरीनिरन्तरविभूषितवामभागम् । नारायणप्रियमनङ्गमदापहारं , वाराणसीपुरपतिं भज विश्वनाथम् ॥ ॥ ॐ श्रीविश्वनाथाय नमः ॐ ॥🙏🚩 भावार्थ:- जिनकी जटाएं गंगा जी की लहरों से सुंदर प्रतीत होती हैं, जिनका वाम भाग सदा पार्वती जी से सुशोभित रहता है, जो नारायण के प्रिय तथा कामदेव के मद का नाश करनेवाले हैं, उन काशीपति को भज !
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07 Nov
@SureshM46

Retired / कृषि

श्रोत्रं श्रुतेनैव न कुंडलेन, दानेन पाणिर्न तु कंकणेन । विभाति कायः करुणापराणां, परोपकारैर्न तु चन्दनेन ॥ भावार्थ:- कानों में कुंडल पहन लेने से शोभा नहीं बढ़ती, अपितु ज्ञान की बातें सुनने से होती है। हाथों की सुन्दरता कंगन पहनने से नहीं होती बल्कि दान देने से होती है। सज्जनों का शरीर भी चन्दन से नहीं बल्कि परहित में किये गये कार्यों से शोभायमान होता है।
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07 Nov
@SureshM46

Retired / कृषि

आदि देव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर:। दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तुते ॥ सप्ताश्वरथ मारुढ़ं प्रचण्डं कश्यपात्पजम्। श्वेत पद्मधरं तं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥ लोहितं रथमारुढं सर्वलोक पितामहम्। महापाप हरं देवं तं सूर्य प्रणमाम्यहम्॥ ॥ ॐ श्रीसूर्याय नमः ॐ॥🙏🚩
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06 Nov
@SureshM46

Retired / कृषि

यस्यास्ति वित्तं स नरः कुलीनः , स पण्डितः स श्रुतवान्गुणज्ञः । स एव वक्ता स च दर्शनीयः , सर्वे गुणाः काञ्चनमाश्रयन्ते ॥ भावार्थ :- जिसके पास धन है, वही कुलीन है ,वही पण्डित है , वही शास्त्रज्ञ है , वही वक्ता है और वह ही दर्शनीय है । इससे सिद्ध होताहै कि सारे गुण धन में ही निहित हैं ।
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06 Nov
@SureshM46

Retired / कृषि

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् । वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतम् शरणं प्रपद्ये ॥ ॥ ॐ श्री हनुमते नमः ॐ ॥ 🙏🚩 भावार्थ:- जिनकी मन के समान गति और वायु के समान वेग है, जो परम जितेन्द्रिय और बुद्धिमानों में श्रेष्ठ हैं, उन पवनपुत्र वानरों में प्रमुख श्रीरामदूत की मैं शरण लेता हूं। #सुप्रभातम्
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05 Nov
@SureshM46

Retired / कृषि

सरस्वत्यै नमो नित्यं भद्रकाल्यै नमो नम:। वेद वेदान्त वेदांग विद्यास्थानेभ्य एव च॥ सरस्वति महाभागे विद्ये कमललोचने। विद्यारूपे विशालाक्षी विद्यां देहि नमोस्तुते॥ ॥ ॐ श्री शारदादेव्यै नमः ॐ ॥🙏🚩 सरस्वती को नित्य नमस्कार है, भद्रकाली को नमस्कार है, और वेद,वेदांत,वेदांग तथा विद्याओं के स्थानों को प्रणाम है ।हे महाभागे,कमल के समान विशाल नेत्रवाली सरस्वती मुझे विद्या दो !🙏
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