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आरती सिंह🕊️
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आरती सिंह🕊️

@AarTee33

साहित्य और समाज सेवा

जीवन में जिज्ञासा की संतुष्टि, मेरे लिए खुशी के सबसे बड़े स्रोतों में से एक है। हिंदी पढ़ो...हिंदी पढ़ाओ!!

calender Joined on June 2021

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@AarTee33

साहित्य और समाज सेवा

हम ही में थी न कोई बात याद न तुम को आ सके, तुम ने हमें भुला दिया हम न तुम्हें भुला सके। तुम ही न सुन सके अगर क़िस्सा-ए-ग़म सुनेगा कौन, किस की ज़बाँ खुलेगी फिर हम न अगर सुना सके। ~ हफ़ीज़ जालंधरी स्वर: जगजीत सिंह और चित्रा सिंह https://youtu.be/mkrMTA8L_-U
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साहित्य और समाज सेवा

नयी कॉपियों को नए रिश्तों की तरह ही नहीं पता होता है हमारी फ़ितरत के बारे में, और इस तरह वे भी रफ़ कॉपियों में बदल जाती हैं..!! ~ विनोद विट्ठल
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साहित्य और समाज सेवा

कौने रंग मुंगवा कवन रंग मोतिया, हो कौने रंग ननदीss तोरे बिरना...! सबज रंग मुंगवा, सफेद रंग मोतिया सांवर रंग हो भावजीss मोरे बिरना..!!🎼🎶🎼 फ़िल्म: ’हीरा मोती’ (1959) स्वर: सुमन कल्याणपुर, सुधा मल्होत्रा https://youtu.be/6KqiPYHSAwA
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साहित्य और समाज सेवा

हिन्दी के प्रसिद्ध नाटककार तथा सिनेमा कथा लेखक #शंकर_शेष (1933-1981) बहुआयामी प्रतिभाशाली लेखक के रूप में पहचाने जाते थे। ‘फन्दी’, ‘एक था द्रोणाचार्य’, ‘रक्तबीज’ आदि की गिनती उनके प्रसिद्ध नाटकों में होती है। 1977 में प्रदर्शित प्रसिद्ध फ़िल्म ‘घरौंदा’ उनकी लिखी कथा पर आधारित थी। #पुण्यतिथि पर भावपूर्ण नमन🙏
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साहित्य और समाज सेवा

कण-कण से है रिश्ता मेरा अब शिव ने मुझे पुकारा है रही ज्योतिर्मय, शिवमयी सदा काशी ने पुनः स्वीकारा है। रही देवों की नगरी काशी पर विश्वनाथ तो मेरे हैं अद्भुत हैं अनंत अगोचर हैं मधुरिम संबंध घनेरे हैं..!! #लता_सिन्हा ’ज्योतिर्मय’ #जन्मदिन💐 #काव्य_कृति ✍️
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साहित्य और समाज सेवा

भोर की पहली किरण के गीत लिक्खूँ रोशनी के बांकपन के गीत लिक्खूँ! कली की पहली चटक के गीत लिक्खूँ नर्म टहनी की लचक के गीत लिक्खूँ जले चूल्हे की अगन के गीत लिक्खूँ! गीत लिक्खूँ फसल की अंगड़ाईयों के फूल की बजती हुई शहनाइयों के समय के सच्चे सृजन के गीत लिक्खूँ..! ~ नचिकेता #सुहानी_भोर🌄 #काव्य_कृति✍️
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साहित्य और समाज सेवा

मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु। मामेवैष्यसि सत्यं ते प्रतिजाने प्रियोऽसि मे ॥१८-६५॥ निष्काम करम, अविराम मनन, विह्वल मन मोहें नमन करिकै। मम मित्र परम, प्रिय मैं तेरौ, सौं लेत हूँ मोसों ही मिलिहै।” #डॉ_मृदुल_कीर्ति🕉️ #गीता_बृजभाषा_काव्यानुवाद #काव्य_कृति✍️
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साहित्य और समाज सेवा

असहनीय दर्द और पीड़ा के बाद वह मुस्कुराते हुए देखती है... यह नव सृजन है..!! ~ सुनीता शानू
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साहित्य और समाज सेवा

निर्मम कुम्हार की थापी से कितने रूपों में कुटी-पिटी, हर बार बिखेरी गई, किंतु मिट्टी फिर भी तो नहीं मिटी! #शिवमंगल_सिंह ’सुमन’ #पुण्यतिथि🙏 #काव्य_कृति ✍️
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साहित्य और समाज सेवा

एक चिड़िया चोंच में तिनका लि‌ए जो जा रही है, वह सहज में ही पवन उंचास को नीचा दिखाती! नाश के दुख से कभी दबता नहीं निर्माण का सुख, प्रलय की निस्तब्धता से सृष्टि का नव गान फिर-फिर! नीड़ का निर्माण फिर-फिर नेह का आह्वान फिर-फिर..!! ~ हरिवंशराय बच्चन #काव्य_कृति ✍️
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