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kanhaiyalal

@88kanhaiyalal

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सनातन धर्मी।

calender Sep 2020 में कू पर आए।

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मैच किर्किट का जब भी होगा काम-काज सब ठप्प रहेंगे शेयर में घरबार बिकेंगे मलिकुल-मौत सरहाने होंगे होटल-होटल जुआ चलेगा अविलाओं के चीर खिचेंगे फ़ोम-वोम के सिक्के होंगे डिबियों बीच ख़ज़ाने होंगे शायर अपनी नज़्में लेकर मंचों पर आकर धमकेंगे सुनने वाले मदऊ होंगे संचालक बेमाने होंगे बेकल इसको लिख लो तुम भी महिला-पुरुष में फ़र्क न होगा रिश्ता-विश्ता कुछ नहीं होगा संबंधी अंजाने होंगे #बेकल_उत्साही
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छोटॆ-छोटॆ से कमरों में मानव सभी सिमट जाएँगे दीवारें ख़ुद फ़िल्में होंगी,दरवाज़े ख़ुद गाने होंगे आँख झपकते ही हर इंसा नील-गगन से लौट आएगा इक-इक पल में सदियाँ होंगी,दिन में कई ज़माने होंगे अफ़्सर सब मनमौजी होंगे,दफ़्तर में सन्नाटा होगा जाली डिग्री सब कुछ होगी कालेज महज़ बहाने होंगे बिन पैसे के कुछ नहीं होगा नीचे से ऊपर तक यारो डालर ही क़िस्मत लिक्खेंगे रिश्वत के नज़राने होंगे... #बेकल_उत्साही
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ऐसी दवाएँ चल जाएँगी भूख प्यास सब ग़ायब होगी नये-नवेले बूढे़ होंगे,बच्चे सभी पुराने होंगे लोकतंन्त्र का तंत्र न पूछो प्रतियाशी कम्प्यूटर होंगे और हुकूमत की कुर्सी पर क़ाबिज़ चंद घराने होंगे गाँव-खेत में शहर दुकाँ में सभी मशीनें नौकर होंगी बिन मुर्ग़ी के अन्डे होंगे बिन फ़सलों के दाने होंगे... #बेकल_उत्साही #काव्य_कृति✍️ #काव्य✍️
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इक दिन ऐसा भी आएगा होंठ-होंठ पैमाने होंगे मंदिर-मस्जिद कुछ नहीं होंगे घर-घर में मयख़ाने होंगे जीवन के इतिहास में ऐसी एक किताब लिखी जाएगी जिसमें हक़ीक़त औरत होगी मर्द सभी अफ़्साने होंगे राजनीति व्यवसाय बनेगी संविधान एक नाविल होगा चोर उचक्के सब कुर्सी पर बैठ के मूँछें ताने होंगे एक ही मुंसिफ़ इंटरनैट पर दुनिया भर का न्याय करेगा बहस मोबाइल ख़ुद कर लेगा अधिवक्ता बेग़ाने होंगे.... #बेकल_उत्साही
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माँ मेरे गूंगे शब्दों को गीतों का अरमान बना दे . गीत मेरा बन जाये कन्हाई, फिर मुझको रसखान बना दे . देख सकें दुख-दर्द की टोली, सुन भी सकें फरियाद की बोली, माँ सारे नकली चेहरों पर आँख बना दे,कान बना दे. मेरी धरती के खुदगर्जों ने टुकड़े-टुकड़े बाँट लिये हैं, इन टुकड़ों को जोड़ के मैया सुथरा हिन्दुस्तान बना दे . गीत मेरा बन जाये कन्हाई, फिर मुझको रसखान बना दे . #बेकल_उत्साही #काव्य_कृति✍️ #काव्य✍️
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गुमनामियों के शहर में घर ढूँढ रहा हूँ मुमकिन तो नहीं लगता है, पर ढूँढ रहा हूँ आँखों से नींद, दिल से सुकूँ छिन गया मेरे मै तेरी इनायत की नज़र ढूँढ रहा हूँ तुमको ख़ुदा से माँग लिया हाथ उठाकर अब अपनी दुआओं में असर ढूँढ रहा हूँ फिरता हूँ चाक-चाक गरेबाँ लिए हुए ऐ हुस्न तुझको शामो-सहर ढूँढ रहा हूँ सजदे को तेरे, मेरी जबीं बेक़रार है दहलीज़ तेरी और तेरा दर ढूँढ रहा हूँ...👇 #मनु_भारद्वाज #काव्य_कृति✍
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जीवन से लड़ते-लड़ते बीत चुके हैं कई रोज़, महीने साल थक हार गया हूँ मैं ख़त्म हो चुके हैं मेरे तरकश के सारे तीर टूट चुकी है तलवार अपना अंतिम भाला भी फेंक चुका हूँ जीवन की ओर अभिमन्यु के मानिंद उठा लिया है रथ का पहिया चुनौतियों से लड़ने के लिए क्षत-विक्षत हो चुका है मेरा कवच और लहू के धारे बह रहे हैं मेरे बदन के घावों से...👇 #अरुण_कुमार_नागपाल #काव्य_कृति✍️ #काव्य✍️
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कविता क्या है खेती है, कवि के बेटा-बेटी है, बाप का सूद है, मां की रोटी है। ~रमाशंकर यादव 'विद्रोही'
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न तो मैं सबल हूं, न तो मैं निर्बल हूं, मैं कवि हूं। मैं ही अकबर हूं, मैं ही बीरबल हूं। #रमाशंकर_यादव 'विद्रोही' #काव्य_कृति✍️ #काव्य✍️
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वंदन मेरे देश – तेरा वंदन मेरे देश पूजन,अर्चन,आराधन,अभिनन्दन मेरे देश तुझसे पाई माँ की ममता और पिता का प्यार तेरे अन्न,हवा,पानी से देह हुई तैयार तेरी मिट्टी-मिट्टी कब है, चंदन मेरे देश वंदन मेरे देश – तेरा वंदन मेरे देश . भिन्न-भिन्न भाषाएँ , भूषा यद्यपि धर्म अनेक किन्तु सभी भारतवासी हैं और हृदय है एक.... #चंद्रसेन_विराट #जन्मजयंती💐🙏 #काव्य_कृति✍️ #काव्य✍️
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