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माँ एक माँ है गरीब होकर बचो को नहीं छोड़ती एक रोटी की लिए भी मज़बूर होकर मज़दूरिया करती है माँ का प्रेम आसमान से भी बड़ा है दरिया से भी बड़ा दुनिया से भी बड़ा आज तक कौन समजा उनके सौभग्य माँ का प्रेम मिला अटूट मातृत्व प्रेम जो पवित्र माता का प्रेम इसे संसार में कोई नहीं मोल माँ का प्रेम है अनमोल जीवन से मुत्यु तक रोम रोम से जुड़ा माँ प्रेम जय हो माता जगत जननी जगदम्बा माता की इसे धरती की माँ नमन
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