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“न तो जीवन कहीं जाता है... न ही मृत्यु कहीं से आती है... दोनों हमेशा अगल - बगल ही मौजूद है...!“
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समाज सेवा और गीत,गजल,भजन लेखन कार्य
पहले मृत्यु का सफर तय करना है फिर, कर्मों के हिसाब से जीवन सुनिश्चित होता है दोंनो एक दूसरे के कोटि पूरक है, बिना मृत्यु के जीवन असंभव है !!और बिना जीवन के मौत असंभव है !!
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transporting with owner
एक हाथ में जीवन है दूसरे में मृत्यु
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Activist जय श्री राम
बहुत सुंदर बात कही आपने🙏
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जीवन का सबसे बड़ा सत्य यही है चदरिया भीनी रे भीनी
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यथार्थ स्वरूप मे ना जीवन है ना मृत्यु ही है अगर जीवन और मृत्यु यथार्थ मे है तो बताओ किसका जीवन है और किसकी मृत्य है
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हाँ जीवन की मंजिल मृत्यु है और मृत्यु की सुरवात जीवन है दोनों दोस्त है
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खेती व पशुपालन तथा राजनीति एवं समाज सेवा
मैडम जी नमस्ते
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Business Owner
आज ना गुडमॉर्निंग,ना कोई कविता घर parivar bache to tandhrusat hai ना भगवान aapki raksha kare.
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Advocate, Judicial Aspirant, Legal Counselor.*For Profession ...
ये हमारे कर्म है हमे किधर ले जाते है
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Yoga Trainer
जैसे हमारे धर्मग्रंथ mein कहा ही गया की हर जीव जंतु में प्राण परमात्मा का ही है . बस शरीर प्रकृति का जिसको प्रकृति एक समय तक संचित करती है फिर प्राणविहीन होते ही पुनः मूल तत्वों में बदल देती hai. खरबों आकाशगंगा हैं तो पृथ्वी एक ही कैसे हो सकती है. कहने को एक ग्रन्थ में सूर्य में भी दिव्य शरीर लिए मनुष्यों की बात कही गयी है . यह बात वही नकार सकता है जिसने धरती का जीवन समझा हो. लेकिन हम १०% ज्ञान
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Ham Bhavi BHARAT (Yuva Pidi) Ke UJJAVAL Bhavishya Ki KAMNA K ...
कॉपीराइट एक्ट किस पर इस्तेमाल करेँ
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Business Owner
Beta ghar ka kaam bhi kar liya karo. Patta nahi kon si dicshnery hai aap ke pass.
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“यह समय आँकड़ों में चल रहा है। लेकिन हमें ‘इंसान‘ के रूप में दर्ज होना है..!“🙏🙏🙏🙏🙏
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देवी जी! कोरोना😰 ने तो पहले ही डरा रखा है। और क्यों डरा😥 रही हैं। 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 😂😂😂😂😂😂😂
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आर्मी रिटायर्ड
मेडम जी🙏💕 आपका लिखना य कहना सही है , मेरा तो मानना यह है कि जो इंसान जिंदा है वह जीवन है, और मृत्यु कहीं से चल कर नहीं आती, इस शरीर में जब आकसीजन प्रवेश करना बंद हो जाती है तो मृत्यु घोषित हो जाता है, फिर माटी का पुतला माटी में ही मिल जाता है, वाह वाह माटी की गुलज़ार. शुभ रात्रि मित्रों.
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Business Owner
Insaniyat bich se nikal kar ब्लैक मेलर ने खरीद ली है जी
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जिन्दगी और मौत सहेली कही जाती है आपस में खेलना कब किसको हरा दे पता भी नहीं चलेगा। शुभ रात्रि।
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कैप्टन (से.नि) आर्मी,कवि,लेखक
जीवन को इस तरह समझ सकते है जन्म मृत्यु के बीच का भाग ही जीवन है । जन्म से पहले मृत्यु के बाद का इन आंखो को दिखाई नही देता । जो आंखो को दिखाई देता है इंद्रिया को अनुभव होता है वह जीवन है ।
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Shivpariwar Sadasya
बेशक 🍀 ये जनम मरण का बंधन लगा ही रहता है हमारे कर्मो के हिसाब से । ये मानब जनम अति दुर्लभ है । सरे जन्मो के किये गए कर्म को एकत्रित करके जो पुण्य कर्म प्राप्त होता है तब नर तन मिलता है । जिससे मोक्ष प्राप्ति की रास्ता सुगम हो जाता है. सत कर्म के द्वारा नहीं तो फिर भटकना सुरु हो जाता है याद रहे । इसमें तनिक भी संदेह नहीं है । ये नर्तन धारी मनुज अवतारी जीना तो जिओ सान से , :::::::;;
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