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कांग्रेस से आत्म आलोचन या आत्म चिंतन की उम्मीद करना अब बेमानी है क्योंकि इस कांग्रेस से भारतीय और राष्ट्रीय तत्व का लोप होचुका है।अब यह स्वार्थपरक ,लूट के आकांक्षी, और विध्वंसक तत्वों के गिरोह का राजनैतिक बैनर बन गया है।पंजाब की घटना ने इस विश्वास को पुख्ता कर दिया है।अब और भ्रम ना पाले देश।रोग जब विकृति हो जाय तो सर्जरी आवश्यक हो जाती है।राष्ट्र रक्षा में बड़े सर्जरी की जरूरत है।
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@mishrarajesh

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ज्ञानवापी सर्वे ने एक नई इबारत लिख दिया है।अब शुरू होगा तथाकथित सेक्युलर बुद्धि जीविओ, विचित्र राजनैतिक जीवो व मिशनरिया मीडिया के पालतू खबर जिविओ का वैश्या विलाप ।खूब गंभीरता व संजीदगी से इन बेहया चाटुकारों का स्वांग अभिनय देश को देखना चाहिए।देखिए कितने कुतर्क बाज थेथरई का ताल ठोकते है। सचेत, संयमित रहिए ।सत्यमेव जयते।
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@mishrarajesh

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जब राजद्रोह की प्रवृति देश में विस्तार ले रही है, अराजकता, अलगाववाद व व्हाइट कालर नक्सलिजम तेजी से बढ़ रहा है ऐसे में इस कानून की समीक्षा होने तक राजद्रोह के मामले में कार्यवाही पर सुप्रीम रोक राष्ट्र घाती तत्वों को एक ऐसा फ्री टाइम पैकेज मुहैया करा रहा है जिसमें वे राजद्रोह का फूल टाइम रिहर्सल कर लें।कोर्ट क्यों भूल रहा है कि कई बार रिहर्सल में दुर्घटनाएं भी होती है।क्या सुप्रिम बुद्धि भी कई बार बुद्धि अपच की शिकार हो जाती है।हर हाल में राष्ट्रद्रोहियों की नकेल कसने में कोताही घातक ही होगी।
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आजकल दिल्ली में अतिक्रमण का मुद्दा गरम है।अतिक्रमण हटाने के विरोध में बी जे पी छोड़ सभी राजनैतिक दल एक्टिव हैं।कारण जानना बहुत सहज है।ये वही लोग है जो अपने राजनैतिक लाभ व अनैतिक कमाई के चक्कर में पहले अतिक्रमण करवाते हैं और जब प्रशासन सख्ती करता है तो ये विक्टिम कार्ड खेल कर आंदोलन जिवी हो जाते है।अतिक्रमण बुल्डोज तो हो ही साथ ही उन अधिकारियों कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई भी हो जिनके कार्यकाल में ये अतिक्रमण हुवे भले वे रिटायर होचुके हो अन्यथा ऐसे अभियान भी एक अप्रभावी रस्म अदायगी बन रह जाएगी।
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पहली बार पूरे उत्तर प्रदेश में ऐसा दिखा की अलविदा की नमाज कहीं भी सड़कों पर नहीं पढ़ी गई। इसमें किसी भी सुलझे मुसलमान को कोई शिकायत भी नहीं हुई फिर तो इसका सीधा सा अर्थ है कि अभी तक जानबूझ कर ऐसा होता रहा और पूर्व की सरकारें अपने स्वार्थी तुष्टिकरण नीति को खाद पानी देती रही।जैसा कि आज भी बंगाल व महाराष्ट्र की सरकार कर रही है।इसी तरह के लोक अपकार सामाजिक नासूर बनाते हैं।कानून के उलंघन को जब सरकारी प्रोत्साहन मिलने लगता है तो उपद्रवी तत्वों का मन बढ़ता ही है। जैसे राजस्थान में हो रहा है।
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कांग्रेस भारतीय मनीषा में कैसे अनफिट हो चुकी है इसका ताजा तरीन उदाहरण आज जोधपुर में दिखा उनका मदारी मुख्यमंत्री मुस्लिम वोट बैंक पक्का करने के लिए मुस्लिम दंगाइयों को पूरी छूट देकर दंगा होने दिया।दंगाइयों की तैयारी देख कर साफ़ लगता है कि इतनी बड़ी तैयारी तत्काल नहीं हो सकती।हम ऐसी घटनाओं को इंटेलिजेंस फेल्योर कह कर कब तक अपने को ठगते रहेंगे।यह दंगा पूरे तौर पर गुजरात सरकार की मौन सहमति ही लगती है।
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उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वे भारत में रहने का फैसला करके बड़ी गलती कर चुके है।उत्सुकता यह है कि सचिन पायलट जी की पत्नी, श्रद्धेय स्व राजेश पायलट जी की दुलारी बहू जो उमर अब्दुल्ला की बहन है वे भी ऐसा ही सोचती है क्या? अगर ऐसा नहीं है तो उमर की यह राजनैतिक नौटंकी बड़ी हास्यास्पद है। इस तरह के बयान इन बाप बेटे की तरफ से अक्कसर आते है अच्छा होगा उमर को पाकिस्तान व उनके अब्बा को अफगानिस्तान विदा करें।
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केंद्रीय विद्यालयों में दाखिले से सांसद को टा को खत्म करना भी उतना ही न्याय संगत कदम है जितना केंद्रीय विश्वविद्यालयों में मेरिट पर प्रवेश बंद कर खुली प्रतियोगी परीक्षा से प्रवेश देना।दोनों ही कदम उपयोगी होंगे बशर्ते प्रवेश परीक्षा की शुचिता फुलप्रूफ हो।स्कूलों ,विश्वविद्यालयों में प्रवेश के सभी चोर दरवाजे बंद होने चाहिए उम्मीद है इस निर्णय से केंद्रीय विद्यालयों के शैक्षिक स्तर में सुधार होगा।
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@mishrarajesh

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धीमी गति से ही सही लेकिन कोरोना की संख्या बढ़ रही है।खास कर महानगरों में अतः जो लोग टिके की दोनों डोज लगवा चुके हैं वे बिना इस बात का इंतजार किए की सरकार फिर इसे लगवाएगी ही वे स्वयं न केंद्रों पर जाकर सतर्कता डोज जरूर लगवा लेे।सरकार ने पूरी भलमनसाहत से अपना धर्म जिया है अब हम सबको अपना नागरिक धर्म पूरा करना चाहिए।आइए चलें अ पने और अपनों को पूर्ण सुरक्षित करें।
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@mishrarajesh

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जहागिर पूरी हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट की अति सक्रियता देश के कोर्टो में व्याप्त अंकल जज व हेलो फ्रेंड जस्टिस की सड़ांध की एक बानगी भी है। यही सुप्रीम कोर्ट जब एक संप्रदाय विशेष के साथ नकली सेक्युलरिस्टों व पेड़ बुद्धिजीवियों द्वारा शाहीन बाग़ कि सड़क पर बलात कब्जा जमाए रक्खा या किसानों की आड़ में अराजक तत्वों व खालिस्तानियों द्वारा सड़क जाम कर लोक अपकार हुआ तब सुप्रीम कोर्ट संज्ञा शून्य था।
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देश में हफ्तों से खूब सांप्रदायिक जोर आजमाइश हो रही है।कई बार स्थति सिर फु ट्टवल तक पहुंच जा रही है।जो आम मानवी के अहित का कारण बन रही है। हां चांदी नकली सेक्युलरिस्टों, मिस्नारिया मीडिया व बेरोजगार हो चु के विपक्ष की जरूर हो रही है।सच सिर्फ एक है कि इतने विशाल देश में न समान नागरिक संहिता है न यूनिफॉर्म सिविल कोड है।आज देश को इनकी सख्त जरूरत है अन्यथा जख्म नासूर बनेंगे । सरकार जल्द सचेत हो।
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