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21 Oct
@Rravat

Self Employed

परिस्थितियां आपको दबा ही नहीं सकतीं, यदि आप मंजिल को पाने की ललक रखते हैं|सफलता के लिए स्वयं को चलना पड़ता है कभी भी कोई किसी का साथ नहीं देता है| "सत्यमेव जयते"
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24 Apr
@Rravat

Self Employed

प्राकृति की चाल जीवन मरण का चक्र प्राकृति तुम्हें भौतिक सुख देह सुख का लालच देकर तुम्हारी भौतिक ऊर्जा को नष्ट करके तुम्हें श्मशान पहुंचाती रहेगी फिर जन्म फिर मरण यह चक्र जब तक चलता रहेगा जब तक कि आप इस भौतिकता से देह से परे को जान नही लेते महसूस नही कर लेते
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23 Apr
@Rravat

Self Employed

जय हनुमान
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07:14
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23 Apr
@Rravat

Self Employed

डमरू वाले से सीख लिया है नटराज !!!! उसके नीलकंठ ने सोख लिए हैं सारे जहर मेरे!!
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27 Mar
@Rravat

Self Employed

लोग कितना नाटक करते हैं!!! नाटक न करें तो सत्य नंगा सामने आ जाता है!!!. औऱ आत्मा पर हिज़ाब के संस्कार!! तो नैतिक हो जाना.. दमन कर लेना सहज हो जाता है!!!!
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16 Jan
@Rravat

Self Employed

ना मे ज्ञानी हू, ना अज्ञानी ना मे बुद्धिमान हू, ना मूर्ख ना मे क्षमताहीन हू, ना क्षमतावान ना मे ठीक-ठाक हू, ना होशियार करना मत मुझ पर शब्दो का एक भी वार क्यूकि मे हू, केवल मेरी परिस्थिति के अनुसार.. हरि ૐ
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03 Dec
@Rravat

Self Employed

परमात्मा कहां और कैसे मिल सकता है... परमात्मा प्राप्ति के लिए पूजा पाठ, दुआ, प्रार्थना, नाम जप, मंत्र जाप दिन भर करते रहना कभी भी उतना प्रभावी नही हो सकता, क्योंकि वो मन में घटने वाली प्रक्रिया ही हो जाती है। भाव के साथ पूजा, मंत्र, नाम जप, दुआ का महत्व है। ईश्वर का अपनी अपनी भाषाओं में नाम पुकार लेने भर से कोई भला नही होता। अक्सर पहले के लोग अपने बच्चो के नाम भगवान के नाम पर रख देते थे, उन्हे
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01 Nov
@Rravat

Self Employed

#hindu *हर साल दशहरे के 21 दिन बाद ही दिवाली क्यों आती है?* *क्या आपने कभी इस बारे में सोचा है?* *विश्वास न हो तो कैलेंडर देख लो।* * ऋषि वाल्मीकि ने रामायण में लिखा है कि भगवान राम को उनकी पूरी सेना को श्रीलंका से अयोध्या तक मार्च करने में 504 घंटे लगे। *अब अगर हम 504 घंटे को 24 घंटे से विभाजित करें तो उत्तर 21 यानि इक्कीस दिन है !!!* *मैं भी हैरान था।
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24 Oct
@Rravat

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Focus on an ocean of positives,not a puddle of negatives
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23 Oct
@Rravat

Self Employed

True line
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23 Oct
@Rravat

Self Employed

"जो व्यक्ति सबकी आकांक्षाओं के अनुरूप ढलता जाता है ,वह स्वयं जल्दी ही कट कट कर समाप्त हो जाता है। "
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