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@Gopikrishna_Soni

Engineer( PHED)1973-2006 Philospher AWGP Shishy Hobby @

एकलखोरा ( जो दुसरो के साथ समन्वय नहीं बिठाता ) :: एक कैटेगरी तो वो है जो सचमुच समरथ होकर भी केवल अपने स्वार्थ का ध्यान रखते है तथा दुसरो को येन केन प्रकारेण अपनी तरफ खड़ा कर सिद्ध करते है कि वे कितने मिलनसार है समाज सेवक है + ऐसे लोग ही किसी सज्जन की अच्छाइयों का विकृत रूप बना उसे एकलखोरा का ख़िताब झूठमूठ का दिला देते है :: इसलिए अच्छी तरह कसौटी पर कस कर ही धारणा बनावे :: बहकावे में ना आवे : sa
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Engineer( PHED)1973-2006 Philospher AWGP Shishy Hobby @

*** सम्भावना काम होती है! बचाव होता है ! बाल की खाल कहा तक निकलोगे ? आगे अपनी 2 समझ? कपडे का मास्क भी काफी बचाव करता है ! सड़क पर चलने के नियम जैसी बात ! मास्क ना लगाने के कई बहाने बताये जा सकते है ! लापरवाही अक्षम्य है ! खुद के साथ परिवार तथा देश मे जान की कीमत से खेलना केसी समझ है?
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अभी कुछ दिन पहले कनाडा के एक कोर्ट के फेसले का सन्दर्भ देकर corona से बचाव के लिए फेस मास्क को बेकार सिद्ध किया गया ! एक सुझाव है मास्क के सूराख़ से छोटे आकार का विषाणु इतना अक्लमंद नहीं कि सूराख़ तलाश कर अपने आप मास्क मे घुस जाएगा! सूराख़ की संख्या का क्षेत्रफल तथा मास्क का क्षेत्रफल का अनुपात देखे तो संभावना के सिद्धांत ( थ्योरी ऑफ probability) के हिसाब से 90% तक विषाणु के प्रवेश की **
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Engineer( PHED)1973-2006 Philospher AWGP Shishy Hobby @

#subhashchandrabose subhashchandra bose अपने आपमे एक जज्बे साहस राष्ट्र के लिए अपार निष्ठा +++ की सजीव murti उनके किए गये कार्यों को नमन!
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इतिहास करवट लेता है कभी 2 सेंकड़ों साल बाद जब दुनिया को सही रास्ता दिखा कर उस पर अग्रसर करने वाला साहसी सूझ-बूझ वाला आता है !
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कोई भी सम्वेदनशील व्यक्ति अपने ( बिना बात के ) अपमान /तिरस्कार / अवहेलना को भूल नहीं सकता ! खास उनके द्वारा जो आयु शिक्षा पद प्रतिष्ठा में समग्र रूप में पीछे हो! बदले की भावना अन्तर आत्मा को कष्ट देती है! भूलने के स्थान पर उसे ऊर्जा मे बदल देना हितकर है! इससे हमारी immunity बढ़ेगी! ऐसे व्यक्ति एक से ज्यादा भी हो सकते है! आपका ज्यादा नुकशान भी कर सकते है! समझा पाये ये मुश्किल! बेहतर है ऊर्जा
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@Gopikrishna_Soni

Engineer( PHED)1973-2006 Philospher AWGP Shishy Hobby @

एक शानदार बात
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@Gopikrishna_Soni

Engineer( PHED)1973-2006 Philospher AWGP Shishy Hobby @

मुफ्त में जब सब कुछ मिल जाता है तो कोई काम क्यों करेगा ! कौन सही मे जरूरतमंद हैं तथा कौन इस सुविधा को बिना जरुरत आसानी से पाकर इसका दुरूपयोग करता है! ये अन्तर करना असंभव होगा! खाली दिमाग शैतान का घर बनेगा ! काम करने वाले लोग नहीं मिलेंगे या काम पर मन लगा कर उत्तम गुणवत्ता क्यों देंगे? आत्म हीनता की ग्रंथि panpegi ! नुकशान राष्ट्र + समाज पर पहले पड़ेगा :: नतीजा अर्थ व्यवस्था को लकवा ! दाम =काम
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आज राष्ट्र स्वतंत्रता के आकाश की खुली वायु मे प्राणवायु ले कर svasth ऊर्जावान लोकतंत्र के रूप मे विकासशील हैं! सभी नागरिकों की जिम्मेवारी बनतीं है कि अपने परिवार के पालन पोषण के अलावा राष्ट्र के सशक्तिकरण के बारे में भी sajag रहे यथा शक्ति योगदान दे! मनसे वचन से कर्म से ! हमारा अस्तित्व राष्ट्र के ******
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राष्ट्र का नेतृत्व हमेशा ऐसे हाथो म रहे चाहे वो देश के भले के लिए kadvi dava दे @
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@Gopikrishna_Soni

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क्या ज़मीन वायु जल मे विविधता प्रकृति का sahaj धर्म है? विज्ञान तो इसे स्वीकार ही करेगा! कोई भी संवेदनशील भी इसे स्वीकार ही करेगा! प्रकृति के इसे लय को इंसान अपनी जरूरतों के अनुसार मोड़ने/ तोड़ने का दुस्साहस करता है तो उस क्रिया की प्रतिक्रिया भी देखने मे आती है; समय का अन्तराल अवश्य होता है! मानव जीवन के आधार बोली भाषा लिपी का क्रमिक विकास भी लंबे समय तक खोज चिंतन मनन का नतीजा है
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