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@Gopikrishna_Soni

Engineer( PHED)1973-2006 Philospher AWGP Shishy Hobby @

क्या ज़मीन वायु जल मे विविधता प्रकृति का sahaj धर्म है? विज्ञान तो इसे स्वीकार ही करेगा! कोई भी संवेदनशील भी इसे स्वीकार ही करेगा! प्रकृति के इसे लय को इंसान अपनी जरूरतों के अनुसार मोड़ने/ तोड़ने का दुस्साहस करता है तो उस क्रिया की प्रतिक्रिया भी देखने मे आती है; समय का अन्तराल अवश्य होता है! मानव जीवन के आधार बोली भाषा लिपी का क्रमिक विकास भी लंबे समय तक खोज चिंतन मनन का नतीजा है
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@Gopikrishna_Soni

Engineer( PHED)1973-2006 Philospher AWGP Shishy Hobby @

**** लगातार *** दंड तो भोगे बिना पीछा नहीं छोड़ता ! स्पस्टीकरण :: रक्त सीमा पर लड़ते जवानो का , शल्य चिकित्सा में मरीज का .दुर्घटना ग्रस्त लोगों का .अपराधी को सजा के समय ! इनमे से सीमा +शल्य में रक्त क्रमशः राष्ट्र सुरक्षा + प्राण रक्षा कर्तव्य में आते है :: अपराध नहीं ! डाकू आतंकी जब बेकसूर लोगो को मारे तो जघन्य अपराध ! जिंदगी की तरह mulywan वैभव सम्पदा रत्न गहना इत्यादि छीनना या धर्म त्यागने को विवश करना भी जघन्य कर्म है ! कानून सजा दे या ना दे . थोड़े में छोड़ दे :: विधाता का न्याय अटल
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@Gopikrishna_Soni

Engineer( PHED)1973-2006 Philospher AWGP Shishy Hobby @

प्राकृतिक न्याय तथा कानून :: न्यायलय का कार्य कानून , नियम , इत्यादि से चलता है जिनका जन्म संविधान से होता है ! कानून तय करता है कि कोई भी अपराध की सजा क्या हो ? इसके लिए चश्मदीद गवाह दस्तावेज इत्यादि प्रमाण की जरूरत पड़ती है !दोनों तरफ के अधिवक्ता न्यायलय में अपने साक्ष्य बताते है ! %%% नेचुरल जस्टिस ( प्राकृतिक न्याय) के लिए विधाता ! विधि समय आने पर अपराध कर्ता + सहयोगी को पाताल से भी खोज लेती है ! कोई गवाह / रिकॉर्ड नहीं चाहिए ! सेंकडो साल बाद अपराधी किसी धर्म जाति में हो दंड *
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@Gopikrishna_Soni

Engineer( PHED)1973-2006 Philospher AWGP Shishy Hobby @

क्या संसार में जो कुछ हो रहा है उसके लिए विधाता ही पूरी तरह जिम्मेदार है ? ये सवाल हर समझदार के दिमाग में आता है ! खासकर जब देखता है जिसकी लाठी उसकी भैंस ? जो समरथ नहीं उसे लगता है विधाता का वश चलता तो ये अन्याय क्यों होता ? स्वाभाविक भी है ! जिस तरह व्यक्ति का प्रारब्ध ठीक वैसे ही देश का प्रारब्ध ! भारतीय उपमहाद्वीप मृत्युलोक है ( भोग लोक नही कर्म भूमि है ) यहाँ जिस वेतन श्रृंखला में अभी है उसमे अच्छे कर्म करके ऊपर / अधम कर्म करके नीचे की वेतन श्रृंखला में ! बाकी सारे भोगलोक
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@Gopikrishna_Soni

Engineer( PHED)1973-2006 Philospher AWGP Shishy Hobby @

मान्यता है कि किसी के पूर्वजों ने बेसहारा लोगों की जमीन हड़प ली या प्रॉपर्टी छीन ली :: तो पीछे आने वाली पीढ़ियों को इसका व्याज सहित दंड भोगना पड़ता है ! आप तर्क देंगे कि शास्त्र तो ये कहते है कि कर्ता ( जिसने पाप किया ) उसी को ये दंड भोगना पड़ता है ! उत्तर :: पाप कर्म के परिपाक ( खिचड़ी तैयार होते ही ) के समय वो लोग ही पुनर्जन्म लेकर अपने कुकर्मो की सजा भोगने वापिस जन्म लेते है ! जिसने समर्थ हो सोच विचार कर पाप किया उसकी सजा १००% + व्याज़ ! जिन्होंने साथ दिया उनकी अनुपातिक सजा ! मजबूर को माफ़ी !
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@Gopikrishna_Soni

Engineer( PHED)1973-2006 Philospher AWGP Shishy Hobby @

क्या युद्ध का जन्म मानव के साथ शुरू हुवा ? व्यक्तिगत से लेकर दो देशों के बीच युद्ध का कारण :: जर जमीन और जोरू को माना जाता है ! लगता है आज भी ये परिभाषा नहीं बदली ! विश्व मे अलग़ २ खेमों में ये रस्सा कस्सी चलती रहती है कि अपने देश के तैयार माल को कम लागत में ज्यादा नफे के साथ ज्यादा से ज्यादा बेचा जाये ! परिवहन की लागत समुद्री मार्ग से कम आती है :: मार्ग कम करें इसके लिए जुगाड़ ! अधिक से अधिक देशों पर हमारा ज़ोर चले ! युद्ध की विभीषिका ने पर्यावरण विनाश + जैविक अस्त्र + मिलावट + नशा
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@Gopikrishna_Soni

Engineer( PHED)1973-2006 Philospher AWGP Shishy Hobby @

भगवान श्री कृष्णा गीताजी में बताते है कि कोई भी घटना बिना ५ भागीदारों के पूरी नहीं होती ! इन ५ में करने वाले ( कर्ता ) के अलावा कर्म के सहयोगी + कारण + प्रारब्ध भी शामिल है ! ये प्रारब्ध क्या है ? ये अतीत ( भूतकाल ) में किये उस व्यक्ति के अपने कर्म है जिसने निश्चय करके ( संकल्पित भाव ) उस कर्म को किया तथा और लोगों का सहयोग भी लिया ! छोटा से छोटा कर्म भी अकेले संभव नहीं ! वो घटित होना था सो घटित हुवा ! समयोपरांत उस कर्म के पकने पर पूरा फल ( दंड / लाभ ) सबसे ज्यादा कर्ता को : भागीदारों को *
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@Gopikrishna_Soni

Engineer( PHED)1973-2006 Philospher AWGP Shishy Hobby @

अंतर राष्ट्रीय परिवार दिवस पर सभी भाई बहिनो को बधाई ! एक ही विनती भगवान से ::: इस मैं मैं के कोलाहल से बचालो संसार को ! हम हम की खुशबू से महका दो हर परिवार को !!!
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@Gopikrishna_Soni

Engineer( PHED)1973-2006 Philospher AWGP Shishy Hobby @

क्या इस्लाम का जन्म हिन्दू पद्धति के विरोध के रूप में हुवा ? जिस हिन्दू विचारधारा में मानवमात्र तो क्या अपने २ इष्ट देव ( भगवान के स्वरूप )को जिस रूप में पूजना चाहे :: पूरी छूट ! घर के जितने लोग वो अपनी मर्जी के स्वरूप को पूजे ! किसी को न पूजना तो वो भी छूट ! इसके विराट स्वरूप में स्वतंत्रता के साथ जीवन यापन परिवार पालन पर्यावरण संरक्षण +++ ( all under one roof ) इंसान तो क्या पशु पक्षी पेड़ पौधे kisi
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@Gopikrishna_Soni

Engineer( PHED)1973-2006 Philospher AWGP Shishy Hobby @

इतिहास के वो अँधेरे जिन्हे मलीपान्ने से ढक कर उनके असली रूप को ढक कर शैतान से देवता बना दिया गया !
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@Gopikrishna_Soni

Engineer( PHED)1973-2006 Philospher AWGP Shishy Hobby @

जो जन्म से भारतवासी है उनके डीएनए में भी एकरूपता मिलेगी ! अतीत में क्या हुवा और क्यों हुवा ये सभी जानते है ! सारा संसार भी भारतीय उप महाद्वीप के देशों में रहने वालो को एक ही नाम से जानता है !कि ये सब हिन्दू है ! वो आप में से कोई नहीं था जिसने जुल्मो सितम किये बल्कि ये आपके पूर्वजो की मज़बूरी थी कि उन्हें विवश होकर पूजा पद्धति बदलनी पड़ी ! कोई आपको बदलने के लिए नहीं कह रहा ! आप इसी देश में जन्मे !’अधिकांश देश के प्रति निष्ठा रख ईमान निभाते ! आपका जीवन स्तर अच्छा बनेगा ! आने वाली पीढ़िया
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