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@Gopikrishna_Soni

Engineer( PHED)1973-2006 Philospher AWGP Shishy Hobby @

अभी व्हाट्स एप्प पर एक : सीख आई उसमे इस तथ्य पर व्यंग था कि एकलखोरा व्यक्ति किसी भी समारोह में जब मुख्य द्वार पर गर्व के साथ लिखवाता है ::: $$$$$$$ परिवार आपका हार्दिक स्वागत करता है %%% तब हंसी आती है वो एकलखोरा ( जीतेजी पिताजी +++ बड़ो ka
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Engineer( PHED)1973-2006 Philospher AWGP Shishy Hobby @

कोई भी सम्वेदनशील व्यक्ति अपने ( बिना बात के ) अपमान /तिरस्कार / अवहेलना को भूल नहीं सकता ! खास उनके द्वारा जो आयु शिक्षा पद प्रतिष्ठा में समग्र रूप में पीछे हो! बदले की भावना अन्तर आत्मा को कष्ट देती है! भूलने के स्थान पर उसे ऊर्जा मे बदल देना हितकर है! इससे हमारी immunity बढ़ेगी! ऐसे व्यक्ति एक से ज्यादा भी हो सकते है! आपका ज्यादा नुकशान भी कर सकते है! समझा पाये ये मुश्किल! बेहतर है ऊर्जा
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एक शानदार बात
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मुफ्त में जब सब कुछ मिल जाता है तो कोई काम क्यों करेगा ! कौन सही मे जरूरतमंद हैं तथा कौन इस सुविधा को बिना जरुरत आसानी से पाकर इसका दुरूपयोग करता है! ये अन्तर करना असंभव होगा! खाली दिमाग शैतान का घर बनेगा ! काम करने वाले लोग नहीं मिलेंगे या काम पर मन लगा कर उत्तम गुणवत्ता क्यों देंगे? आत्म हीनता की ग्रंथि panpegi ! नुकशान राष्ट्र + समाज पर पहले पड़ेगा :: नतीजा अर्थ व्यवस्था को लकवा ! दाम =काम
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आज राष्ट्र स्वतंत्रता के आकाश की खुली वायु मे प्राणवायु ले कर svasth ऊर्जावान लोकतंत्र के रूप मे विकासशील हैं! सभी नागरिकों की जिम्मेवारी बनतीं है कि अपने परिवार के पालन पोषण के अलावा राष्ट्र के सशक्तिकरण के बारे में भी sajag रहे यथा शक्ति योगदान दे! मनसे वचन से कर्म से ! हमारा अस्तित्व राष्ट्र के ******
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राष्ट्र का नेतृत्व हमेशा ऐसे हाथो म रहे चाहे वो देश के भले के लिए kadvi dava दे @
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क्या ज़मीन वायु जल मे विविधता प्रकृति का sahaj धर्म है? विज्ञान तो इसे स्वीकार ही करेगा! कोई भी संवेदनशील भी इसे स्वीकार ही करेगा! प्रकृति के इसे लय को इंसान अपनी जरूरतों के अनुसार मोड़ने/ तोड़ने का दुस्साहस करता है तो उस क्रिया की प्रतिक्रिया भी देखने मे आती है; समय का अन्तराल अवश्य होता है! मानव जीवन के आधार बोली भाषा लिपी का क्रमिक विकास भी लंबे समय तक खोज चिंतन मनन का नतीजा है
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माँ भारती के लाल ज़मीन से जुड़े सादगी की प्रतिमूर्ति राष्ट्र के लिए समर्पित भारत के poorva प्रधानमंत्री जिन्हें बहुत कम समय मे खो दिया देश ने! अनमोल रत्न को poony दिनांक पर श्रद्धांजलि!
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श्रद्धेय स्वामी विवेकानंदजी के जन्म दिवस पर पुण्य स्मरण
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समय की नजाकत को देखते हुवे कुछ भगवान के पार्षद धरती पर अत्याचार की आँधियों का मुकाबला करने, निर्दोष सच्चे मानवों को राहत देने धरती पर आते है! ये सीधे भगवान की आज्ञा में रहने वाले ( पद का मोह नहीं रखने वाले) होते हैं! विशेष शक्तियों के साथ आते हैं तथा अंश अवतार के आदेश पूरे करते हैं!ऐसे ही थे योगेश्वर गुरू govindsinhji जिनके अमर बलिदान (3 पीढ़ियों का) दुनिया के इतिहास मे मिशाल नहीं!
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कोटि 2 naman
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