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साहित्य और समाज सेवा

कण-कण से है रिश्ता मेरा अब शिव ने मुझे पुकारा है रही ज्योतिर्मय, शिवमयी सदा काशी ने पुनः स्वीकारा है। रही देवों की नगरी काशी पर विश्वनाथ तो मेरे हैं अद्भुत हैं अनंत अगोचर हैं मधुरिम संबंध घनेरे हैं..!! #लता_सिन्हा ’ज्योतिर्मय’ #जन्मदिन💐 #काव्य_कृति ✍️
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सुहानी भोर 🌄
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हर हर हर महादेव 🌿🌹
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साहित्य और समाज सेवा

हम अपने हक़ से जियादा नज़र नहीं रखते चिराग़ रखते हैं, शम्सो-क़मर नहीं रखते। हमने रूहों पे जो दौलत की जकड़ देखी है डर के मारे ये बला अपने घर नहीं रखते। #अमिताभ_त्रिपाठी ’अमित’ #जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं💐 #काव्यकृति✍️
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साहित्य और समाज सेवा

आज गूगल अपने विशेष डूडल द्वारा भारत का 73वां #गणतंत्र_दिवस मना रहा है। डूडल में गणतंत्र दिवस परेड में भारत की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हुए भारतीय जानवर, तबला; परेड पथ; ऊंट-घुड़सवार बैंड के हिस्से के रूप में एक सैक्सोफोन; कबूतर; और राष्ट्रीय ध्वज को चिन्हित किया गया है। #गणतंत्रदिवस 🇮🇳 #GoogleDoodle
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साहित्य और समाज सेवा

राष्ट्र गगन की दिव्य ज्योति राष्ट्रीय पताका नमो नमो! भारत जननी के गौरव की अविचल शाका नमो नमो! कर में लेकर इसे सूरमा, कोटि-कोटि भारत संतान। हँसते-हँसते मातृभूमि के चरणों पर होंगे बलिदान..!! ~ श्यामलाल गुप्त ’पार्षद’ #गणतंत्रदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं🇮🇳 #लेखनी ✍️
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साहित्य और समाज सेवा

तुझको या तेरे नदीश, गिरि, वन को नमन करूँ मैं! मेरे प्यारे देश! देह या मन को नमन करूँ मैं? किसको नमन करूँ मैं भारत, किसको नमन करूँ मैं? निखिल विश्व की जन्म-भूमि-वंदन को नमन करूँ मैं? किसको नमन करूँ मैं भारत! किसको नमन करूँ मैं? ~ दिनकर #सुहानी_भोर🌄 #काव्यकृति ✍️
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साहित्य और समाज सेवा

जानि कृपाकर किंकर मोहू। सब मिलि करहु छाड़ि छल छोहू॥ निज बुधि बल भरोस मोहि नाहीं। तातें बिनय करउँ सब पाही॥ #तुलसीदास #रामचरित_मानस #बालकाण्ड #जय_श्रीराम🙏 #काव्यकृति ✍️
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साहित्य और समाज सेवा

पाँवों में काँटे चुभे , हुआ नहीं कुछ भान । रमी राधिका श्याम में , भूल जगत का ध्यान ।। ◆सुनीता पाण्डेय ’सुरभि’
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साहित्य और समाज सेवा

ये अलग बात है साक़ी कि मुझे होश नहीं, वरना मैं कुछ भी हूँ एहसान-फ़रामोश नहीं..!! ~अब्दुल हमीद अदम प्रस्तुति : जगजीत सिंह
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साहित्य और समाज सेवा

परोपकारी पुरुष मुहिम में, पावन पद पाते देखे, उनके सुन्दर नाम स्वर्ण से सदा लिखे जाते देखे..!! ~ श्यामलाल गुप्त ’पार्षद’ #काव्यकृति✍️
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साहित्य और समाज सेवा

प्रातः बेला टटके सूरज को जी भर देखे कितने दिन बीत गए! नहीं देख पाया पेड़ों के पीछे उसे छिप-छिपकर उगते हुए! नहीं सुन पाया भोर आने से पहले कई चिड़ियों का एक साथ कलरव..!! नहीं पी पाया दुपहरी की बेला आम के बगीचे में झुर-झुर बहती शीतल बयार..!! #भरत_प्रसाद जी को #जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं💐 #लेखनी✍️
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साहित्य और समाज सेवा

देश के अत्यंत लोकप्रिय एवं चिंतनशील पत्रकार तथा नवभारत,सारिका, नंदन, साप्ताहिक हिन्दुस्तान और कादम्बिनी के संपादक #राजेंद्र_अवस्थी ( 1930-2009) की #जन्मजयंती पर भावपूर्ण नमन🙏 उनकी लेखनी उत्कृष्ट साहित्यिक रचनाओं की जन्मदात्री एवं गंभीर दार्शनिक चिंतनधारा की निर्मल स्रोतस्विनी थी। वे ऑर्थर गिल्ड ऑफ इंडिया के अध्यक्ष भी रहे।
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