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साहित्य और समाज सेवा

भोर की पहली किरण के गीत लिक्खूँ रोशनी के बांकपन के गीत लिक्खूँ! कली की पहली चटक के गीत लिक्खूँ नर्म टहनी की लचक के गीत लिक्खूँ जले चूल्हे की अगन के गीत लिक्खूँ! गीत लिक्खूँ फसल की अंगड़ाईयों के फूल की बजती हुई शहनाइयों के समय के सच्चे सृजन के गीत लिक्खूँ..! ~ नचिकेता #सुहानी_भोर🌄 #काव्य_कृति✍️
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सुप्रभात जय श्रीराम
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साहित्य और समाज सेवा

मछलियाँ आँसू पीती हैं फिर भी सागर का खारापन कम नहीं होता..!! ◆ वीरेन्द्र गोयल
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साहित्य और समाज सेवा

पंख बिना-बिन डोर के, मनवा बेपरवाह । अंतहीन उड़ता फिरे,लेकर अनगिन चाह ।। ~ ’प्रमिला श्री तिवारी’ दीदी को #जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं💐 #लेखनी✍️
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साहित्य और समाज सेवा

कभी पहले देखा नहीं ये समाँ ये मैं भूले से आ गया हूँ कहाँ यहाँ मैं अजनबी हूँ..!! फ़िल्म : ’जब जब फूल खिले’ (1965) आनंद बक्षी । कल्याण जी आनंद जी । मो.रफी https://youtu.be/afmPZ83bmMQ
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साहित्य और समाज सेवा

अतिथि सूरज! तुम कहाँ से आ रहे हो? तुम नहीं लगते हमारे सूर्यकुल के अभी भी गहरे धुएँ हैं उधर पुल के। गुंबदों के सिरे पर तुम छा रहे हो! ग़लत तिथि पर धूप का होना अचानक ख़ुशबुओं के ये तुम्हारे नए बानक यों हमारी साँस को भरमा रहे हो..!! ~ कुमार रवीन्द्र #सुहानी_भोर🌄 #काव्य_कृति✍️
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साहित्य और समाज सेवा

ग्रह भेषज जल पवन पट पाइ कुजोग सुजोग। होहि कुबस्तु सुबस्तु जग लखहिं सुलच्छन लोग ॥७(क)॥ सम प्रकास तम पाख दुहुँ नाम भेद बिधि कीन्ह। ससि सोषक पोषक समुझि जग जस अपजस दीन्ह ॥७(ख)॥ #तुलसीदास #रामचरित_मानस #बालकाण्ड #जय_श्रीराम🙏 #काव्य_कृति ✍️
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साहित्य और समाज सेवा

#आदि_शंकराचार्य ने भारतीय संस्कृति के विकास और संरक्षण में अप्रतिम योगदान के रूप में भारत के चारों कोनों में चार मठों और बारह ज्योतिर्लिंगों की स्थापना की थी। #गोवर्धन पीठ-ऋग्वेद- पुरी उड़ीसा #शारदा पीठ-यजुर्वेद - शृंगेरी, रामेश्वरम #द्वारिका पीठ -सामवेद - द्वारिका, गुजरात #ज्योतिर्मय पीठ - अथर्ववेद -बद्रिकाश्रम, उत्तराखंड
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साहित्य और समाज सेवा

परखना मत, परखने में कोई अपना नहीं रहता किसी भी आईने में देर तक चेहरा नहीं रहता..!! ~ डॉ बशीर बद्र
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साहित्य और समाज सेवा

उड़ती है पार-द्वार धूप की चिरैया! पानी के दर्पण में, बिम्ब नया उभरा बिखर गया दूर-पास, एक-एक कतरा पलकों-सी मार गई धूप की चिरैया! पूरब में कुंकुम का, थाल सजा-सँवरा किरणों-सी दुलहन का, रूप और निखरा आँगना गई बुहार धूप की चिरैया..!! ~ तारादत्त निर्विरोध #सुहानी_भोर🌄 #काव्य_कृति✍️
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साहित्य और समाज सेवा

धूम कुसंगति कारिख होई। लिखिअ पुरान मंजु मसि सोई॥ सोइ जल अनल अनिल संघाता। होइ जलद जग जीवन दाता॥ #तुलसीदास #रामचरित_मानस #बालकाण्ड #जय_श्रीराम🙏 #काव्य_कृति ✍️
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साहित्य और समाज सेवा

#जटोली_शिव_मंदिर : सोलन (हि. प्रदेश) में स्थित 111 Ft ऊंचे गुंबद वाले दक्षिण- द्रविड़ शैली में बने इस मंदिर को एशिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर कहा जाता है। लगभग 39 वर्ष की अवधि में बने इस मंदिर की नींव स्वामी कृष्णानंद परमहंस महाराज द्वारा वर्ष 1974 में रखी गयी थी। #DekhoApnaDesh🇮🇳
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