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काया यदि स्वस्थ है सब कुछ करते हुए भी ओर नहीं करते हुए भी बहुत कुछ किया जा सकता है। प्रभु नाम जप स्मरण में भी काया का स्वस्थ होना बहुत आवश्यक है। पीड़ा पीड़ा हि होती है।
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यदि संस्कार संस्कृति धर्म और राष्ट्र हित राष्ट्र भाव भावना से परिपूर्ण भाव से भरे हो तो बच्चे दोही अच्छे। क्योंकि शेर के दो ही बच्चे पुरा जंगल कांपता है? पर शिक्षा व भाव ऐसे भरे हो।। लोकतंत्र की बिसात अलग है।। जय श्री राम
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हम बहुत दुखी है समय आ गया विरासत में मिली पुंजी का उपयोग आज भारत भूमि आतंकवाद के रूप में भोग रहा है। विनम्र श्रद्धांजलि शत-शत नमन मेरे देश के वीरों को।। जय हिन्द वन्देमातरम
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#नानाजी_देशमुख एक महान संत समाज सेवा की ओर प्रेरित करने वाले आधुनिक युग के प्रणेता की महान आत्मा को शत-शत नमन। समाज कल्याण समाज सुधारक के रूप में जिन भी महान आत्मा ने भारत को दिशा दी ऐसे महान पुरुषों को एक पार्टी अथवा दल या सरकारों के बदलने के बाद पार्टी तक सिमित न ह किया जाना चाहिए। सरकार किसी भी पार्टी की हो किन्तु उनका योगदान हमारा पथ है जय श्री राम
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मनुष्य जीवन का आधार केवल पेट भरा ई ओर चाटूकारिता कत ई नहीं हो सकता? अथाह खून बहाया प्राणो का उत्सर्जन किया अपने सामने छोटे छोटे बच्चों को जिन्दा दिवारो में चूनवा दिया आधा शरीर करवत से काटा गया धीमा जहर और लोहे की गरम गरम सरियो से यातनाएं दी गईं और आज लाशो पर राजनीति केवल,, कुर्सी, ,, पाने के लिए देश कितना ओर आगे जाएगा। संस्कृति संस्कार राष्ट्र हित व धर्म-कर्म त्याग का मोल नहीं रहा क्यो?
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सम्मान से पीछे मत हटना सम्मान दोगे तो मिलेगा अवश्य ? धीरज से काम लीजिए किन्तु राष्ट्र हित सर्वोपरि यहां समझोता नहीं। जय श्री राम
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#कूपेकहो विश्व के छोटे-छोटे देश अपने धर्म संस्कृति संस्कार और परम्पराओं यहां तक कि राष्ट्र धर्म को आज तक बचाए हुए है। फिर भारतीय ता और हिन्दू धर्म व सनातन धर्म पर ,,, में, ,, यह परिवर्तन रुपी कुठाराघात क्यो? क्या लोकतंत्र यही है क्या इसी को लोकतंत्र कहते हैं चुनी हुई सरकार के सामने यह सब जायज है। क्या लोकतांत्रिक व्यवस्था इसी लिए है।। क्या समग्र राष्ट्र के लिए यह यह घातक नहीं।
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नियंत्रण यदि नियति का हिस्सा है तो इसे हर हाल में स्वीकार करना ही पडेगा और मानना भी? जब घर परिवार समाज में यदि आप नियंत्रण को स्वीकार करते हैं तो राष्ट्र उन्नति के लिए क्यो नही?
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आदर ओर सम्मान देना हमारे संस्कार है इससे परे जो कुछ कह जाता वहीं लोटकर हमारे पास आता है इसलिए शब्दों का चयन ठीक से हम कर जय श्री राम
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ये ??? इनके पावन मुखारविंद निकला हर शब्द ,,,हेड लाइन बन जाती है चाहे झूंठ का पुलिंदा हो या अपशब्द। ओर सच के लिए डींडोरा पीटना पड़ता है। क्या यह सच है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का यह कैसा सच देश के सर्वोच्च पद का न मान न सम्मान क्या यह भी सच नहीं।।।
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आप की सोच आप के विचार ***क्रान्ति का हिस्सा है**** आप के विचार आपके शब्द भारत और भारतीय ता का श्रंगार है। बुद्धि बल बुद्धि मता में स्वार्थ को आड़े मत आने दो सत्य संत सनातन और राष्ट्रीय अस्मिता के लिए सत को आहूत कीजिए। अस्मिता की आंखों से खून बह रहा है रोको रोको रोको सच्चे कर्म योगी की भूमिका में देश हित सबसे सर्वोपरि है। आगे बढ़कर अस्मिता को बचाइए यही तो मानव धर्म है। जय
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