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ये ??? इनके पावन मुखारविंद निकला हर शब्द ,,,हेड लाइन बन जाती है चाहे झूंठ का पुलिंदा हो या अपशब्द। ओर सच के लिए डींडोरा पीटना पड़ता है। क्या यह सच है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का यह कैसा सच देश के सर्वोच्च पद का न मान न सम्मान क्या यह भी सच नहीं।।।
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आप की सोच आप के विचार ***क्रान्ति का हिस्सा है**** आप के विचार आपके शब्द भारत और भारतीय ता का श्रंगार है। बुद्धि बल बुद्धि मता में स्वार्थ को आड़े मत आने दो सत्य संत सनातन और राष्ट्रीय अस्मिता के लिए सत को आहूत कीजिए। अस्मिता की आंखों से खून बह रहा है रोको रोको रोको सच्चे कर्म योगी की भूमिका में देश हित सबसे सर्वोपरि है। आगे बढ़कर अस्मिता को बचाइए यही तो मानव धर्म है। जय
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देश की अखंडता संप्रभुता और राष्ट्रीय अस्मिता पर प्रहार करना देश के कर्णधारों के लिए सब जायज है लोकतंत्र में क्या यही अभिव्यक्ति की आजादी है कि कुर्सी के लिए देश हित नहीं पार्टी हित सर्वोपरि। प्रश्न बहुतेरे । आम जन आहत हैं इस प्रकार के वक्तव्य से क्या मां भारती का अपमान नहीं है।
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जहां विश्वास नहीं वहां आजमाईश जरुरी? हम सब राम जी के और राम जी हमारे यहां आजमाईश की जरूरत नहीं। यहां नाम जप की सुमिरन की आवश्यकता है ऊं लक्ष्मी कान्ताय नमः।।
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राष्ट्र हित सर्वोपरि इसे ध्यान में रखते हुए ट्विटर हो या चीन या हो पाकिस्तान किसी से कोई समझौता उचित नहीं। समझौता मानव मानवता का धर्म है किन्तु? सबको परखा एक बार अपने आत्म विश्वास देश की शक्ति को ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, ,,,,,, जय भारत
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***श्रम रहित पराश्रित जीवन *** विकास के द्वार सदा के लिए बंद कर देता है? जय श्री राम
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अभिव्यक्ति की आजादी यह एक गंभीर विषय है कि अभिव्यक्ति में भाषा का का स्तर इतना गिरा दिया कि ना बड़ा न छोटा न मान सम्मान ना आदर न स्तर ये सब मेरे देश को चलाने वाले महापुरुष इस देश को कहा ले जाएंगे।
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नियम और क़ानून समाज व देश की भलाई राष्ट्र को समृद्ध बनाने के लिए है किन्तु ? ***स्वार्थ*** यहां भी अपना हित सबसे पहले।
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काया यदि स्वस्थ है सब कुछ करते हुए भी ओर नहीं करते हुए भी बहुत कुछ किया जा सकता है। प्रभु नाम जप स्मरण में भी काया का स्वस्थ होना बहुत आवश्यक है। पीड़ा पीड़ा हि होती है।
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आज का जीवन चालाकियों से भरा पुरा है जिसमें हमसब शामिल हैं स्वार्थ से ऊपर की सोच शायद रसातल की ओर जाती जा रही हैं।
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