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यारों की यारिया वो पल याद आत है आज भी मुज दोस्तो पुराने दिन याद आत है वो जो भोलापन था सब मे मिलकर है पल भर जीने का आज कल की भागदौड़ ने सब कुछ ही छीन लिया भोलेपन मैं को जवानी आई जेमेदारियो ने फिर जगा बनाई सब कुछ करने मैं खुद को यू वेस्ट किया उम्र के तीसरे पहर मैं किस को पड़ी है आज कौन किस हाल मैं है सालो बाद मिलने पर भी जो न करे गिला शिकवा दोस्त आज भी न बदल रिश्ता
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