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अब तो इतजार है उस उम् का जब दोनो बैठे याद करेगे गुजरे हर लमहे का न होगा कोई जिममेदारी का बोझ न होगा किसी बात का शोर मेर तेरा वकत होगा वो कागज मुड क एक होगा
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