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कितना अजीब लगता है, जब देखता हूं कि,प्रतिदिन, सारी पृथ्वी पर,विभिन्न वर्ग सृष्टि के रचयिता और पालनहार, यानि कि अपने अपने परमात्मा की रक्षा के बहाने मनुष्य ही , मनुष्यों का खून बहा रहे हैं॥
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