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#उलझे_प्रश्न__प्रगतिबाधक_भृष्टाचार (१०) महाराष्ट्र में मठाधीश सारे गलत कामों के संरक्षक, संचालक और पोषक हैं। अर्नब के केस में क्या हुआ? जब साम, दाम न चला तो दन्ड पर उतर आए।सुशांत के केस में सेन्टर तक की ऐजेंसियां मैनेज हो गयीं। एकाध जो मैनेज नहीं होता उसपर व्यक्तिगत उतर आते हैं और सरकार उसके खिलाफ षडयंत्रों में शामिल हो जाती है। कल अर्नब था, आज वानखेडे हैं, कल कोई हिम्मत कर पाएगा?
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