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संसार जो आप देख रहे हो ” शून्य” है क्या ?या आपको सभी साकार जिसका कुछ न कुछ आकार है स्वतः दिखाई देता है , जब सबकुछ दिखाई देता है तो हम ” शून्य ” कैसे मान ले । निराकार क्यों माने ।। उसी तरह किसी वस्तु को बनानेवाला निर्विशेष निराकार कैसे हो सकता है ।नहीं हो सकता तो फिर संसार की सृष्टि कर्त्ता निर्विशेष,निराकार,” शून्य ” कैसे हो सकता है । हाँ,अलग वात है की उनका तेज ज्योति स्वरूप ब्रह्म, शून्य
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