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ए खुदा न हम अपने मर्जी से आए हैं तेरे इस दुनिया में और न ही रुख़सत हो सकते हैं तेरे मर्जी के बिना। कठपुतली बना कर भेजा है तूने हम सबको, डोर रख ली अपने हाथों में, किसी की डोरी खींचता है बड़े प्यार से और किसी की बड़े बेदर्दी से।
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