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दीपक के नीचे रहे सदा अंधेरा क्षेत्र। निज दोष को ही कभी नहीं देखते नेत्र। देख लिए इंसान सब बूढ़े और जवान। अपनी धुन में मस्त हैं नहीं प्रभु का ध्यान। कड़वी औषधि से सदा होता रोग निदान। जो पहले कट सत्य को होता वही महान। इसीलिए कहता हूं गाते रहो सदा जय श्रीराम जय श्रीराम नाम नहीं ज प है जय श्री राम बोलते रहो आठो याम ऐसे और पोस्ट देखने के लिए और राष्ट्रीय ब्राह्मण महासंघ से जुड़ने के लिए क्लिक करे
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