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#आध्यात्म (५८) इच्छाएं मन को आंदोलित करती हैं! जिसे हम अशांति कहते हैं! अनियन्त्रित और अति-नियन्त्रित इच्छाएं दोनों ही अशांति का कारक हैं! यदि इच्छा होगी तो वह कर्म को जन्म देगी ही! यदि इच्छा नहीं होगी तो नीरसता उपजेगी! इसलिए इच्छा जरूरी भी है पर इच्छा नियन्त्रित हो और उससे उपजे कर्म का निस्पादन गीता के सिधांत के अनुसार हो तभी मन शांत रह सकता है! जय श्रीकृष्णा मित्रो।
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