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#महाभारत (७९) कभी कभी दुष्टों की दुष्टता से मन भ्रमित, व्यथित और क्रोधित हो उठता है। आज वानखेड़े प्रकरण को देखकर हर सज्जन व्यक्ति ऐसा महसूस कर रहा है, जैसे वह स्वयं टारगेट किया जा रहा हो? दुष्ट जो खुद सर से पांव तक गन्दगी में सना है, वह सबका ध्यान अपनी ओर से हटाने के लिए सज्जन में कमियां निकालता है। इस सिस्टम को कौन समझाये? ढ़ूढ़ो तो भगवान की कमियां भी निकाल दो?
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