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#आध्यात्म (५७) मंत्र, तंत्र, और यंत्र मन्त्र से मानवीय चेतना को झकझोर कर आन्तरिक परिवर्तन व शोधन होता है, इसके अतिरिक्त परोक्ष जगत का परिष्करण भी होता है। तंत्र में मानवीय चेतना को पदार्थ में डालकर अपने लक्ष्य को भेदते हैं। तीव्र गति से प्रहार, पर आत्मपरिष्कार से वास्ता नहीं। यंत्र पदार्थ की ऊर्जा का उपयोग कर मानव को भौतिक सुख साधन प्रदान करता है, पर मानसिक शांति से कोई वास्ता नहीं।🙏
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