back
user
मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु। मामेवैष्यसि सत्यं ते प्रतिजाने प्रियोऽसि मे ॥१८-६५॥ निष्काम करम, अविराम मनन, विह्वल मन मोहें नमन करिकै। मम मित्र परम, प्रिय मैं तेरौ, सौं लेत हूँ मोसों ही मिलिहै।” #डॉ_मृदुल_कीर्ति🕉️ #गीता_बृजभाषा_काव्यानुवाद #काव्य_कृति✍️
user
Replying to @AarTee33
0/400