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#आध्यात्म ५६ खोखली हंसी, खोखले वाक्य ,खोखले भाषण आम हो गये हैं! जब बात में सच्चाई न हों तो खोखलापन आ ही जाता है! झूठे वाक्य भाव विहीन होते हैं और सच्चाई भावपूर्ण! व्यक्ति के हाव भाव, आंखें, शब्द सब सच्चाई बयान करते हैं! सच्चाई जानने के लिए किसी मशीन की आवश्यकता नहीं! बहुत से निर्णय जज अपने विशेषाधिकार से लेते हैं! सच्चाई दिखने पर मी लार्डस को यथोचित निर्णय लेना ही चाहिए! शुभप्रभात मित्रो!
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