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भारतीय चुनाव व्यवस्था की अजीबोगरीब स्थिति और प्रकिया। १) आम नागरिकों के वोटों से एक नेता किसी राजनीतिक दल के पक्ष से चुनाव जीत कर लोकसभा, विधानसभा पहुंच जाता है, उसके बाद अपने निजी स्वार्थ के लिए एक दल से दुसरे ,तीसरे दल में शामिल हो जाता है बिना किसी चुनाव, न्याय व्यवस्था ,आम नागरिकों के सहमति या अनुमति के बिना, क्या यह चुनाव व्यवस्था आम नागरिकों के वोट, क्षमता,मानवाधिकार का उल्लघंन नहीं है?
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