back
user
सारी धरती पर लगी है आग , रहनुमाओं की हुंकारों से॥ मसाल थामे है हर एक हाथ , रहनुमाओं की हुंकारों से॥ किसी भी अंजुली में पानी नहीं, आग बुझाने को॥ लगता है, पत्थरीले हो गये जज्बात, रहनुमाओं की हुंकारों से॥
0/400