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जिस प्रकार संध्या तथा प्रातःकाल के समय सूर्य अपने प्रखर रूप मे नहीं रहता है। उसी प्रकार परिस्थिति के अनुसार ही मनुष्य को उग्र अथवा मृदु व्यवहार करना चाहिए। परिस्थिति अनुकूल न हो तो क्रोध करने से कोई लाभ नहीं होता है| प्रातः संध्या धीमा रहता, किंतु दुपहरी सूर्य चमकता, जीवन का यह पाठ सिखाता, समयानुकूल व्यवहार सुहाता। शाकाहारी बनें, स्वस्थ रहें, शुभ दिन हो .. 🙏🙏🙏🙏💐💐💐💐🙏🙏🙏
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