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मित्रो, आज शाम हम एक पुरानी गीत सुना ” सजन रे झूट मत बोलो, खुदा के पास जाना है, ना हाथी ना घोड़ा है, वहां पैदल ही जाना है ”,। गीत तो बहुत अच्छा है, हमरी शिकायत गीत से नही पर अचानक मन में एक योचना आया कि ” वतन में इतने सारे झूट बोलनेवाले हैं, अगर इन सब को हिंदुस्तान में ही पुनर्जन्म मिला तो अगले जन्म में इनका किस प्राणी के रूप में होगा ”। हमने एक पर्ची सिद्ध किया है किंतु वहीअधूरा रह गया है,
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