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मनुष्य जितना *इंद्रियों* के वश होता जाता है ... उतनी ही उसकी आयु घटती जाती है ... इंद्रियां केवल *भौतिक* सुखों की *भोगना* के लिये हैं ... जो सदा काल नहीं रहेगा ... अतः भले ही सांसारिक सुख भोगो ... पर उस सुख के साथ *चिपको* नहीं ... क्योंकि संसार की कोई भी *वस्तु* अविनाशी नहीं है ... अविनाशी है तो बस ... तुम खुद और खुदा ... 🌸 सुप्रभात ... 💐💐 आपका दिन शुभ हो ... 💐💐
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