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मैं फिर जनम लूँगा फिर मैं इसी जगह आऊँगा उचटती निगाहों की भीड़ में अभावों के बीच लोगों की क्षत-विक्षत पीठ सहलाऊँगा लँगड़ाकर चलते हुए पावों को कंधा दूँगा गिरी हुई पद-मर्दित पराजित विवशता को बाँहों में उठाऊँगा । मैं फिर जनम लूँगा फिर मैं इसी जगह आऊँगा... #koopekaho
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