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निर्मम कुम्हार की थापी से कितने रूपों में कुटी-पिटी, हर बार बिखेरी गई, किंतु मिट्टी फिर भी तो नहीं मिटी! #शिवमंगल_सिंह ’सुमन’ #पुण्यतिथि🙏 #काव्य_कृति ✍️
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