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इसे धरती में गोमाता की बाद आपको पवित्र माँ ही है बोलती है वह जीवन में आपकी नीव से अबर तक भी साथ देती है वह माँ है एक देवी माता का रूप कितना भी बोलो काम है माँ का प्रेम ही सत्य है न कोई स्वार्थ होगा माँ का प्रेम जिसे मिला अमृत है जीवन उनका जय हो माता
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