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समान नागरिक संहिता संविधान की आत्मा है और देश संविधान से चलता है। ऐसा विधान जो सब पर समान रूप से लागू हो।किसी भी सेक्युलर देश में धार्मिक आधार पर अलग अलग कानून देश के एकता के समक्ष गंभीर संकट के कारण भी हो जाते हैं।इसका स्थाई समाधान समान नागरिक संहिता लागू करने में ही निहित है।इससे रूढ़िवाद,कट्टरवाद ,जातिवाद, क्षेत्रवाद,संप्रदायवाद भाषावाद, स्वा र्थ वाद समाप्त होंगे व वैज्ञानिक सोच विकसित होगी।
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