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मनुष्य जीवन का आधार केवल पेट भरा ई ओर चाटूकारिता कत ई नहीं हो सकता? अथाह खून बहाया प्राणो का उत्सर्जन किया अपने सामने छोटे छोटे बच्चों को जिन्दा दिवारो में चूनवा दिया आधा शरीर करवत से काटा गया धीमा जहर और लोहे की गरम गरम सरियो से यातनाएं दी गईं और आज लाशो पर राजनीति केवल,, कुर्सी, ,, पाने के लिए देश कितना ओर आगे जाएगा। संस्कृति संस्कार राष्ट्र हित व धर्म-कर्म त्याग का मोल नहीं रहा क्यो?
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