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*** लगातार *** गुरूजी ( तेग बहादुरजी ) के ना बोलते ही उनकी गर्दन तलवार के एक झटके से अलग कर दी गई :: याद रहना हर सनातनी का पहला कर्तव्य है कि उस दिन अगर गुरूजी ::::::: अपना बलिदान नहीं देते तो पूरी दुनिया से सनातन का सूर्य अस्त हो जाता %%% क्या इस क़ुरबानी को भूलने का दुस्साहस कर हम गद्दारी की कालिख अपने मुँह पर पोत सकते है ? गुरूजी के इस बलिदान के बाद उनके ४पोते + अंतिम गुरूजी गोविंदसिंघजी k
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