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*“अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस“* की हार्दिक शुभकामनायें। “करें योग रहे निरोग“ *पतंजलि योग दर्शन में कहा गया है कि -* *योगश्चित्तवृत्त निरोधः*- अर्थात् चित्त की वृत्तियों का निरोध ही योग है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो ह्रदय की प्रकृति का संरक्षण ही योग है। जो मनुष्य को समरसता की ओर ले जाता है।
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