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शून्य सा आहसास जब अपनों के बीच पसारने लग जाए अपनी थुलथुल बाहे। समझ लेना रिश्तों की थाली मैं परस गया पक्का स्वार्थ आंसू अधकचरे शब्द बौने से लगने लगे भांप जाना जहरीली हवा का एक झोंका तैर रहा यही कहीं आस पास।
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