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तालिबान पर सोच हमारे ‍‍‍‍प्रेम का कहाँ पाठ साला बता वो हमे जल रहा तन मन बचा वो हमे नफरत से आ गया हूँ तंग बड़ा ओ न जख्म और मनमोहन अब और कब तक बे गुनाह को सजा मिलता रहेगा गुनहगार बे खौफ अत्याचार करता रहेगा
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