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पद्मसंभव
@पद्मसंभव
यह दुःख ही है,जो सारे संसार को शरण देता है ! इसके बिना प्रेम की शोभा ही नहीं...! प्रेम यदि कृष्ण है,तो दुःख इसकी कनिष्ठा पर धारित गोवर्धन पर्वत....!
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