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राजनीति कि ऐसी चादर ओढ़ ली है समाज ने कि उढने बेढने खाने पिने मे भी होने लगी है साजिशें इतना रग क्या चढ़ा लिया अपना ही वजूद गवा लिया पहले जो बातें होती थी चाये के खोखे में आज कल होने लगी व्हट्सएप्प फेसबुक के हर कौने में राजनीति ने घर तोडे हर सरहद मे दिवार की ये देश रहा है उसमे भी अब दरार की सोचा था सकूं का कुछ पल कू के साथ बिताऊगी पर यहां भी लोगों ने आलोचना की जगह बना ल
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