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🙏 मैं हूं जमाने के कदर में इस तरह आगोश में! सभ्यता कदमों पड़ी है मैं पड़ी हूं पाबोस में! दिन-रात बंटती जा रही हूं तेरे-मेरे बस सिवा, जैसे कोई जीता हो यहां धूप, कोई ओस में!! पाबोस - [फ़ारसी] आदर प्रणाम _______________Dr.Arohi 💐🙏
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