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*किताबों की ”अहमियत” अपनी* *जगह है जनाब,* *सबक वही याद रहता है जो* *वक्त और लोग सिखाते हैं* *चरित्र अगर कपड़ो से तय होता* *तो ”कपड़ो की दुकान” मंदिर कहलाती।*
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