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”कश्ती” है पुरानी _दरिया” बदल गये मेरी ”तलाश” का भी ”जरिया” बदल गये ”लोग” कहते हैं ये ”वक़्त” बदल गये मेरी ”नजरों” में आज़ हम ”बदल” गये. ।।।
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