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भाषा भव पार ल देती है मां शब्द ही नहीं जीवन का अभ्युदय है तीन रुप में मात्र भाषा मां जन्म देने वाली ओ मात्रभूमि जिसने जीतना सहेजा उसे उतना मीला जय मां ।।
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